Parishram Ka Mahatva in Hindi – परिश्रम का महत्व पर निबंध

जीवन में परिश्रम के महत्व पर हिंदी में निबंध पढ़ें? Essay on the Importance of Labor in Hindi – Parishram Ka Mahatva in Hindi (परिश्रम का महत्व पर निबंध)

अत्यन्त छोटे-से जीव चीटियों को हम सभी देखते है। शायद ही किसी ने चीटियों को सोते या आराम से बैठे देखा हो। चीटियों का लघुतम जीवन परिश्रम से भरा हुआ होता है।

वे अनवरत श्रम करती है। वे जीवन की समस्याओ को अपने श्रम से सरलता से सुलझा लेती है। चीटियों का जीवन हमारे लिए आदर्श उदाहरण है। ऐसा कौन-सा कार्य है जो परिश्रम-साध्य न हो।

नेपोलियन की डायरी में असंभव जैसा कोई शब्द नहीं था। कर्मवीर, दृढ़-प्रतिज्ञ महापुरुषों के लिए संसार का कोई भी प्राप्तव्य कठिन नहीं होता। परिश्रमी व्यक्ति निरन्तर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होता रहता है।

उसके संकल्प कभी ठंडे नहीं होते, प्राकृतिक कारण भी विघ्न बनकर उसके मार्ग को अवरुध्द नहीं कर सकते। सफलता उसी मनुष्य का वरन करती है, जिसने उसकी प्राप्ति के लिए श्रम किया हो।

Parishram Ka Mahatva in Hindi – परिश्रम का महत्व पर निबंध
Parishram Ka Mahatva in Hindi – परिश्रम का महत्व पर निबंध

प्रथम श्रेणी उन्ही विद्यार्थियों को गले लगाती है, जो उसकी प्राप्ति के लिए पूरे वर्ष श्रमपूर्वक अध्ययन करते है। भर्तृहरि के अनुसार,

उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैती लक्ष्मीः दैवेन देयमिति कापुरुषः वदन्ति। दैवं निहित्य कुरुपौरुषमात्मशक्त्या, यत्ने कृति यदि न सिध्दयति को&त्र दोषः।।

अर्थात उद्योगी पुरुष को ही लक्ष्मी प्राप्त होती है। दैव को छोड़कर मनुष्य को यथाशक्ति पुरुषार्थ करना चाहिए। यदि प्रयत्न करने पर भी कार्य-सिध्दि न हो तो यह विचार करना चाहिए कि हमारे प्रयास में क्या कमी रह गई।

जीवन में यदि सफलता प्राप्त करनी है यो परिश्रमी होना नितान्त आवश्यक है। आलसी, अनुद्योगी, अकर्मण्य व्यक्ति जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं होता। गति का ही दूसरा नाम जीवन है जिस मनुष्य के जीवन में गति नहीं है।

वह आगे नहीं बढ़ सकता। मानव-जीवन संघर्षो के लिए है, संघर्ष के पश्चात उसे सफलता मिलती है। जो व्यक्ति संघर्षो से, श्रम से डर गया, वह मानव नहीं पशु है, उसका जीवन व्यर्थ है।

केवल इच्छा करने से ही कार्य की सिध्दि नहीं होती, उद्योग और कठिन परिश्रम से ही कार्य की सिध्दि संभव है। अंग्रेजी में एक कहावत है-”God helps those who help themselves.”अर्थात ईश्वर उन्ही की सहायता करता है, जो अपनी सहायता स्वयं करने में समर्थ होते है।

परिश्रम करने से मनुष्य को आत्मिवक शांति प्राप्त होता है। उसका ह्रदय पवित्र होता है, उसके संकल्पो में दिव्यता आती है, उसे सच्चे ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। परिश्रम से मनुष्य को यश और धन दोनों ही प्राप्त होते है। परिश्रमी व्यक्ति जीवन में ही यश प्राप्त नहीं करता, मृत्यु के पश्चात वह अपना आदर्श भी छोड़ जाता है।

Final Thoughts –

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