Harivansh Rai Bachchan Poems Agnipath | अग्निपथ – हरिवंश राय बच्चन की अमर कविता

Harivansh Rai Bachchan Poems Agnipath: अग्निपथ हरिवंश राय बच्चन की एक अमर कविता है, जो हमें साहस, संघर्ष और सफलता की महिमा को दर्शाती है। इस कविता में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को संस्कृति और समाज के सामरिक आदर्शों के माध्यम से व्यक्त किया है। यहां हम इस अग्निपथ के बारे में विस्तृतता से चर्चा करेंगे:

Harivansh Rai Bachchan Poems Agnipath | अग्निपथ – हरिवंश राय बच्चन की अमर कविता
Harivansh Rai Bachchan Poems Agnipath | अग्निपथ – हरिवंश राय बच्चन की अमर कविता

साहसिकता की प्रेरणा:

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अग्निपथ हमें साहसिकता की महत्वपूर्णता को बताती है। इस कविता में हरिवंश राय बच्चन ने साहसिकता के महत्व को बहुत सुंदरता से व्यक्त किया है और हमें जीवन के रुखों में संघर्ष करने की प्रेरणा दी है।

अस्थायी संघर्षों का महत्व:

अग्निपथ विभिन्न अस्थायी संघर्षों की महत्वता को उजागर करती है। यह कविता हमें बताती है कि संघर्ष ही हमें एक सफल और पूर्ण जीवन की ओर ले जाता है।

अपार समर्पण की महिमा:

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अग्निपथ अपार समर्पण की महिमा को प्रशंसा करती है। इस कविता में हमें यह याद दिलाया जाता है कि समर्पण के माध्यम से हम अपार सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

अग्निपथ हिंदी साहित्य की मशहूर कविताओं में से एक है। इसकी पंक्तियों में उच्च गर्व और उत्साह की भावना समाहित होती है। यह हमें अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।

Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi Agnipath

Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi Agnipath
Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi Agnipath

अग्निपथ कविता

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,

एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,

अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,

कर शपथ,
कर शपथ,
कर शपथ,

अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,

लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

अग्निपथ – हरिवंश राय बच्चन की अमर कविता

कौन कहता है आसमान में सुराख़ नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों!

सिद्ध होता है आसमान और जमीं चूमती है,
जब किसी की मानसिकता चारों तरफ़ उछालती है।

कौन कहता है की समय के साथ बदल नहीं सकता,
ज़रा सोचिए जब रेत बन जाती है और सबको छूमती है।

अग्निपथ हो, अग्निपथ हो, अग्निपथ हो यारों,
ज़िन्दगी जीने का ताज़ है ये अग्निपथ हमारा।

कौन कहता है कि भाग्य पर बहुत निर्भरता होती है,
जब तक आप नहीं चाहते, कुछ भी नहीं हो सकता।

जब दृढ़ निश्चय और संकल्प है इन्सान के पास,
तभी सामर्थ्य और सच्ची मंज़िल का पथ खोलता है।

अग्निपथ हो, अग्निपथ हो, अग्निपथ हो यारों,
ज़िन्दगी जीने का ताज़ है ये अग्निपथ हमारा।

कौन कहता है कि सपने सच नहीं हो सकते,
जब तक उनके पीछे आपकी मेहनत और लगन होती है।

जब ज़िंदगी का रुख बदल जाता है और सपने पूरे होते हैं,
तब ही आपकी जीवनरेखा नयी कविता लिखती है।

अग्निपथ हो, अग्निपथ हो, अग्निपथ हो यारों,
ज़िन्दगी जीने का ताज़ है ये अग्निपथ हमारा।

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